कब होगा तीसरा विश्व युद्ध..



वर्तमान में दुनिया कई मोर्चों पर युद्ध जैसी स्थिति का सामना कर रही है. अमेरिका और इजरायल ने ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों और मिलिट्री बेस को निशाना बनाकर बड़े एयरस्ट्राइक किए हैं. ईरान का रहबर (सुप्रीम लीडर) अयातुल्ला अली खामेनेई मारा जा चुका है. इसी के साथ ईरान ने दुबई, बहरीन, रियाद, कुवैत और कतर समेत अनेक देशों के अमेरिकन अड्डों पर जबरदस्त मिसाइल हमले करके जवाबी कार्रवाई की है. एक तरफ जहां खाड़ी देशों में युद्ध की आग भड़की है, वहीं दूसरी तरफ रूस-यूक्रेन युद्ध अपने पांचवें साल में प्रवेश कर चुका है. चीन की ताइवान पर निगाहें, उत्तर कोरिया के परमाणु व मिसाइल परीक्षण और इजरायल-ईरान के बीच तनाव, कुल मिलाकर दुनिया इस वक्त बारूद के ढेर पर बैठी नजर आ रही है. इन तमाम घटनाओं से यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हम एक नए विश्व युद्ध की ओर बढ़ रहे है या क्या तीसरा विश्व युद्ध शुरू हो गया है? क्या इसका भी कोई आधिकारिक ऐलान होता है? और अगर होता है तो हमें कैसे पता चलेगा ?.
वास्तव में वर्ल्ड वॉर शब्द ऐतिहासिक है, कानूनी नहीं. इंटरनेशनल कानून वर्ल्ड वॉर घोषित करने के लिए कोई तय संख्या जरूरी नहीं है. इसका इस्तेमाल इतिहासकार तब करते हैं, जब किसी लड़ाई में दुनिया की बड़ी ताकतें शामिल होती हैं और यह दुनिया के कई इलाकों में फैल जाती है. आधुनिक इतिहास में अब तक दो विश्व युद्ध हो चुके हैं, प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) और द्वितीय विश्व युद्ध (1939-1945). इतिहास गवाह है कि पहले वर्ल्ड वॉर में 30 से ज्यादा देश शामिल थे. जबकि दूसरे वर्ल्ड वॉर में 50 से ज्यादा देश शामिल थे और इसमें लगभग 70 से 100 लाख सैन्य बल शामिल था. निसंदेह ईरान और इजरायल के बीच चल रहा वर्तमान युद्ध बेहद खतरनाक है, लेकिन यह महज एक छोटी जंग है. असली विश्व युद्ध दुनिया की दो महाशक्तियों की भिड़ंत पर होगा.
विश्व युद्ध का अर्थ होता है ऐसा युद्ध, जिसमें दुनिया के कई प्रमुख देश प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल होना. तीसरे विश्वयुद्ध की शुरुआत में एक साथ कई देशों में जंग शुरू होगी, जैेसे कि रूस बनाम अमेरिका व NATO, चीन बनाम ताइवान, ईरान बनाम इजरायल. जब ये सभी संघर्ष एक समय पर उभरें. अगर NATO, QUAD, SCO या दूसरे बड़े सैन्य गठबंधन सक्रिय रूप से युद्ध में उतर जाएं. यददपि इस बार युद्ध सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि डेटा, स्पेस, इंटरनेट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के ज़रिए भी लड़ा जाएगा.
यह दिलचस्प बात है कि तीसरे विश्व युद्ध की कोई घंटी नहीं बजेगी और न ही कोई नेता टीवी पर इसकी घोषणा करेगा. लेकिन जब एक साथ कई मोर्चों पर गोलियां चलने लगें, जब दुनिया के देश एक-दूसरे पर प्रतिबंध लगाने लगें और जब आप एक सामान्य जीवन से सीधे आपातकालीन स्थिति में पहुंच जाएं, तो यह समझ लीजिए कि तीसरा विश्व युद्ध शुरू हो गया है . बैंकिंग सिस्टम, एयरपोर्ट, सैटेलाइट्स और पावर ग्रिड पर साइबर अटैक बढ़ जाएं. वैश्विक ट्रेड बंद होने लगे, पेट्रोलियम या अनाज जैसी जरूरी चीजों की कीमतें आसमान छूने लगें. इस तरह से भी तीसरे विश्वयुद्ध की शुरुआत हो सकती है.
विश्व युद्ध में आमतौर पर बड़े मिलिट्री अलायंस होते हैं, जो देशों को विरोधी गुटों में बांट देते हैं. जैसे दूसरे विश्व युद्ध में एलाइड पावर्स और एक्सिस पावर्स थे. इनमें से हर एक में कई देश मिलकर मिलिट्री कार्रवाई करने के लिए तैयार थे. ये अलायंस स्थानीय झगड़ों को ग्लोबल टकराव में बदल देते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि देश अपने सहयोगियों का साथ देने और स्ट्रैटेजिक हितों की रक्षा करने के लिए जुड़ते हैं. आज की दुनिया में युद्ध छिपकर, साइबर हमलों, आर्थिक प्रतिबंधों, आतंकी हमलों और तकनीकी हथियारों के माध्यम से लड़ा जाता है. अतः इसकी शुरुआत अचानक हो सकती है और कई बार तो लोगों को महीनों बाद यह समझ आता है कि वे युद्ध की स्थिति में जी रहे थे.
हालांकि आज जिस तरह से महाशक्तियां युद्ध में परोक्ष रूप से शामिल हो रही हैं, वह भविष्य के लिए एक बड़ा खतरा जरूर है. बहरहाल युद्ध कभी भी समाधान नहीं होता, क्योंकि इसमें हारने वाला तो बर्बाद होता ही है, जीतने वाला भी बहुत कुछ खो देता है.