
संस्कारों की नन्हीं कोंपल : आयशा तोलानी
जहां सेवा भाव और संस्कारों का संगम होता है, वहीं मानवता का सच्चा स्वरूप निखरता है
(आर. के. हिमथानी)
भोपाल की धरा पर मानवता की सेवा की अमर मिसाल, ब्रह्मलीन संत हिरदाराम साहब के 19वें निर्वाण दिवस पर एक ऐसा पल देखने को मिला जिसने हर किसी के हृदय को स्पर्श कर लिया। मात्र 2.5 वर्ष की नन्हीं आयशा तोलानी जब अपनी मासूम श्रद्धा के साथ संत जी के चरणों में नतमस्तक हुई, तो वह दृश्य केवल एक तस्वीर नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के उज्जवल भविष्य का संकेत बन गया।
विरासत का सम्मान
इतनी छोटी उम्र में, जहाँ बच्चे अपनी दुनिया में मग्न होते हैं, आयशा का सेवा और संस्कार के इन गहरे मूल्यों से जुड़ना विरल है। डीडी प्ले स्कूल की प्री-नर्सरी की यह नन्हीं छात्रा जिस सहजता से मानवता की इस महान विरासत का सम्मान कर रही है, वह वास्तव में बहुत ही सुंदर और प्रेरणादायक है।
मार्गदर्शन का प्रतिबिंब
आयशा के इन छोटे कदमों में छिपी बड़ी श्रद्धा उसके माता-पिता और विद्यालय द्वारा दिए जा रहे श्रेष्ठ मार्गदर्शन का सजीव प्रतिबिंब है। यह इस बात का प्रमाण है कि यदि बचपन की नींव संस्कारों से सींची जाए, तो वह व्यक्तित्व समाज के लिए एक मिसाल बनता है।
“नन्हे हाथ, गहरी श्रद्धा और संस्कारों की ये पावन रीत… आयशा ने संत जी के निर्वाण दिवस पर सेवा की परंपरा को जीवित कर दिया।”
संत हिरदाराम जी के आशीर्वाद से आयशा का जीवन सेवा और सद्गुणों के मार्ग पर सदैव अग्रसर रहे, यही हमारी मंगलकामना
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