भोपाल, 6 मई । प्रज्ञा प्रवाह, मध्यभारत प्रांत द्वारा आयोजित पुस्तक विमोचन समारोह में श्री प्रशांत पोल द्वारा लिखित “इंडिया से भारत -एक प्रवास” पुस्तक का विमोचन मंगलवार सायं को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में माननीय डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री, मध्यप्रदेश शासन के मुख्य आतिथ्य में हुआ।
प्रज्ञा प्रवाह मध्यभारत प्रांत द्वारा आयोजित पुस्तक विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए माननीय डॉ. मोहन यादव ने कहा कि “इंडिया से भारत” केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि देश के वैचारिक, सांस्कृतिक और आत्मगौरवपूर्ण पुनर्जागरण की सजीव कथा है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से 2026 तक का कालखंड भारत के लिए स्वर्णिम दौर है, जिसे आज देशवासी प्रत्यक्ष अनुभव कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लेखक प्रशांत पोल ने इस पुस्तक में भारत की उस यात्रा को दर्ज किया है, जिसमें औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त होकर राष्ट्र ने अपने आत्मसम्मान, सांस्कृतिक चेतना और निर्णायक नेतृत्व को वापस प्राप्त किया है।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद कई ऐतिहासिक अवसरों पर भारत ने अपने सामर्थ्य के अनुरूप निर्णय नहीं लिए, जिसका उल्लेख पुस्तक में अत्यंत साहसिक ढंग से किया गया है।
उन्होंने इस वैचारिक परिवर्तन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और प्रज्ञा प्रवाह जैसी संस्थाओं की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया और कहा कि कुप्रचार के विरुद्ध तथ्य, विचार और संस्कृति के माध्यम से संघर्ष ही भारत की शक्ति है।
पुस्तक विमोचन के अवसर पर कार्यक्रम के अध्यक्ष श्रीहेमंत शर्मा, निदेशक, टीवी 9 भारत वर्ष, डॉ. रविंद्र कान्हेरे, अखिल भारतीय अध्यक्ष, विद्या भारती, श्री राकेश सिंह, मंत्री लोकनिर्माण विभाग, श्री प्रभात जी, प्रभात प्रकाशन, श्री दीपक शर्मा जी, अखिल भारतीय सह-संयोजक, प्रज्ञा प्रवाह एवं श्री धीरेंद्र चतुर्वेदी, संयोजक मध्यभारत प्रांत प्रज्ञा प्रवाह विशेष रूप से उपस्थित रहे।
श्री हेमंत शर्मा ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि यह पुस्तक केवल एक वैचारिक रचना नहीं, बल्कि भारत को उसकी सांस्कृतिक जड़ों से पुनः जोड़ने का सशक्त प्रयास है। उन्होंने कहा कि “इंडिया से भारत” पुस्तक के लेखक प्रशांत पोल निरंतर भारतीय समाज को पाश्चात्य मानसिकता से बाहर निकालकर आत्मगौरव से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं। यह पुस्तक नई पीढ़ी को यह सोचने के लिए प्रेरित करती है कि हम एक राष्ट्र के रूप में कौन हैं, हमारी पहचान क्या है और हमारी सांस्कृतिक जड़ें कहां हैं।
उन्होंने कहा कि एक समय भारत की बात करना रूढ़िवादी माना जाता था, लेकिन आज देशभर में सांस्कृतिक चेतना का नया दौर शुरू हुआ है।
उन्होंने कहा कि अब “अंग्रेजों भारत छोड़ो” के बाद वैचारिक स्तर पर “इंडिया भारत छोड़ो” जैसे आत्मबोध की आवश्यकता है, और यह पुस्तक उसी विचार का विस्तार है।
उन्होंने पुस्तक-पठन की घटती प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए कहा कि किताबें केवल जानकारी नहीं देतीं, बल्कि मनुष्य को प्रश्न करने, आत्ममंथन करने और बौद्धिक जड़ता से बाहर निकालने का कार्य करती हैं। “इंडिया से भारत” इसी प्रकार की वैचारिक हलचल पैदा करने वाली पुस्तक है।
कार्यक्रम में मध्यप्रदेश शासन के
21 कैबिनेट मंत्री सहित विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय के प्राध्यापक एवं विद्यार्थी भी शामिल हुए। इस दौरान प्रज्ञा प्रवाह के डॉ संजय द्विवेदी, श्री संजय जैन, डॉ. उदित्य सिंह सेंगर, डॉ. वंदना मिश्रा , केवली जैन भी उपस्थित हुए। कार्यक्रम का संचालन श्री अभिषेक शर्मा, युवा आयाम प्रमुख, मध्यभारत प्रांत, प्रज्ञा प्रवाह ने किया एवं आभार श्री धीरेंद्र चतुर्वेदी,संयोजक, मध्यभारत प्रांत, प्रज्ञा प्रवाह ने माना।
1965 से 2014 तक भारत की यात्रा को रेखांकित करती है पुस्तक ‘इंडिया से भारत’ : लेखक प्रशांत पोल
पुस्तक विमोचन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लेखक प्रशांत पोल ने कहा कि इस पुस्तक के लेखन की प्रेरणा उन्हें एक ऐसी ऐतिहासिक घटना से मिली, जिसने भारत की तत्कालीन राष्ट्रीय मानसिकता और अंतरराष्ट्रीय स्थिति को उजागर किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 1965 के भारत–पाकिस्तान युद्ध के दौरान गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री बलवंत राय मेहता की पाकिस्तान वायुसेना द्वारा हत्या कर दी गई थी। यह हमला उस समय किया गया, जब मुख्यमंत्री बलवंत राय मेहता कच्छ क्षेत्र का निरीक्षण करने के लिए एक नागरिक विमान से यात्रा कर रहे थे।
लेखक पोल ने कहा कि विमान में नागरिक होने के स्पष्ट संकेत देने के बावजूद पाकिस्तानी वायुसेना के सेबर जेट ने हमला कर विमान को मार गिराया, जिसमें मुख्यमंत्री सहित नौ लोगों की मृत्यु हो गई। इसके बावजूद देश में न तो व्यापक जनआक्रोश देखने को मिला और न ही इस घटना को राष्ट्रीय अपमान के रूप में लिया गया। उन्होंने इसे उस दौर के “हीन, दीन और लाचार भारत” का प्रतीक बताया।
उन्होंने आगे कहा कि इसी मानसिकता का एक और उदाहरण वर्ष 1969 में देखने को मिला, जब मोरक्को के रबात में इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) की बैठक में भारत को पाकिस्तान के विरोध के कारण अपमानजनक रूप से लौटना पड़ा। यह घटनाएं उस समय भारत की कमजोर अंतरराष्ट्रीय स्थिति को दर्शाती हैं।
लेखक पोल ने कहा कि यदि स्वतंत्रता के बाद भारत की आर्थिक प्रगति की तुलना श्रीलंका, पाकिस्तान, इज़राइल और दक्षिण कोरिया जैसे देशों से की जाए, तो 21वीं सदी के प्रारंभ तक भारत कई क्षेत्रों में पीछे रहा, जबकि ऐतिहासिक रूप से भारत हजारों वर्षों तक विश्व की सबसे समृद्ध और ज्ञानवान अर्थव्यवस्था रहा था।
उन्होंने सवाल उठाया कि प्रतिभाओं से परिपूर्ण होने के बावजूद भारत पीछे क्यों रह गया। इसका कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत अपनी भाषा, परंपरा, इतिहास और सांस्कृतिक पहचान से कटता चला गया। आक्रांताओं के महिमामंडन और औपनिवेशिक मानसिकता ने राष्ट्रीय आत्मगौरव को कमजोर किया।
लेखक पोल ने कहा वर्ष 2014 भारत के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ। इसके बाद भारत में आत्मविश्वास, नेतृत्व और निर्णय क्षमता का नया दौर शुरू हुआ। उन्होंने कोविड काल का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस देश को कभी केवल वैक्सीन की नकल करने वाला माना जाता था, उसी भारत ने एक वर्ष से भी कम समय में स्वदेशी वैक्सीन विकसित कर न केवल अपने नागरिकों की रक्षा की, बल्कि सौ से अधिक देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराई।
उन्होंने कहा कि आज विश्व के लगभग 70 प्रतिशत वैक्सीन का निर्माण भारत में हो रहा है। यह परिवर्तन “इंडिया से भारत” की यात्रा का प्रतीक है।
लेखक पोल ने इस वैचारिक परिवर्तन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया और कहा कि यह जागरण अचानक नहीं, बल्कि वर्षों के निरंतर प्रयास और सांस्कृतिक चेतना का परिणाम है। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जब भारत अपनी पहचान पर गर्व के साथ विश्व मंच पर खड़ा होगा, तब वह पुनः विश्वगुरु की दिशा में अग्रसर होगा। उन्होंने कहा कि यही भाव इस पुस्तक का मूल संदेश है और यदि इससे समाज को प्रेरणा मिलती है, तो उनका लेखन सफल है।
मुख्यमंत्री ने भारतीय ज्ञान परंपरा के पुनर्जागरण में प्रज्ञा प्रवाह की भूमिका को बताया निर्णायक
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रज्ञा प्रवाह की स्थापना 1987 में राष्ट्र की बौद्धिक शक्ति को संगठित कर भारतीय पुनर्जागरण के लक्ष्य से हुई थी। यह संगठन देश के विकास से जुड़ी मूलभूत और समसामयिक समस्याओं के अध्ययन, विश्लेषण और समाधान के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत भारतीय ज्ञान परंपरा को लेकर प्रज्ञा प्रवाह द्वारा विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में अध्ययन समूह संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने अपेक्षा जताई कि प्रदेश के सभी शासकीय और अशासकीय शिक्षण संस्थानों में भारतीय ज्ञान परंपरा से संबंधित उपलब्ध साहित्य पर अध्ययन समूह और चर्चा मंडल सक्रिय किए जाएं, जिससे विद्यार्थियों में पाठ्यक्रम से आगे बढ़कर अध्ययन और प्रस्तुति की क्षमता विकसित हो।
शोध प्रस्तुतियों के माध्यम से सूचना के अधिकार तथा युवा विमर्श से जुड़े महत्वपूर्ण निष्कर्षों को साझा किया
कार्यक्रम में प्रज्ञा प्रवाह के अंतर्गत मध्य प्रदेश पॉलिसी रिसर्च एनालिसिस लीग द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम विषय पर किए गए अध्ययन की रिपोर्ट अभिषेक शर्मा, संचिता जैन, डॉ. सविता भदौरिया एवं भूपेन्द्र सिंह जाटव द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। इसी क्रम में मध्य प्रदेश के युवाओं में विमर्श के बिंदुओं से संबंधित अध्ययन रिपोर्ट को डॉ. राम बाबू मेहर, कोकिला चतुर्वेदी, अम्बुज तिवारी तथा श्री अर्जुन सिंह ठाकुर द्वारा प्रस्तुत किया गया। यह शोध कार्य प्रज्ञा प्रवाह के अंतर्गत गठित टीम द्वारा संपन्न किया गया है। इस दौरान प्रज्ञा प्रवाह के युवा आयाम द्वारा शोध अध्ययन की रिपोर्ट की प्रतियां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को प्रदान की गई। इस पर उन्होंने कहा कि प्रज्ञा प्रवाह की टीम द्वारा जो शोध अध्ययन हुआ है, उसे शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को अध्ययन हेतु सौंपा जाएगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि ये अध्ययन प्रदेश के विकास में उपयोगी सिद्ध होंगे।
“इंडिया से भारत” की यात्रा आज आँखों के सामने साकार हो रही है : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
भोपाल, 5 मई । प्रज्ञा प्रवाह, मध्यभारत प्रांत द्वारा आयोजित पुस्तक विमोचन समारोह में श्री प्रशांत पोल द्वारा लिखित “इंडिया से भारत -एक प्रवास” पुस्तक का विमोचन मंगलवार सायं को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में माननीय डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री, मध्यप्रदेश शासन के मुख्य आतिथ्य में हुआ।
प्रज्ञा प्रवाह मध्यभारत प्रांत द्वारा आयोजित पुस्तक विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए माननीय डॉ. मोहन यादव ने कहा कि “इंडिया से भारत” केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि देश के वैचारिक, सांस्कृतिक और आत्मगौरवपूर्ण पुनर्जागरण की सजीव कथा है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से 2026 तक का कालखंड भारत के लिए स्वर्णिम दौर है, जिसे आज देशवासी प्रत्यक्ष अनुभव कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लेखक प्रशांत पोल ने इस पुस्तक में भारत की उस यात्रा को दर्ज किया है, जिसमें औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त होकर राष्ट्र ने अपने आत्मसम्मान, सांस्कृतिक चेतना और निर्णायक नेतृत्व को वापस प्राप्त किया है।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद कई ऐतिहासिक अवसरों पर भारत ने अपने सामर्थ्य के अनुरूप निर्णय नहीं लिए, जिसका उल्लेख पुस्तक में अत्यंत साहसिक ढंग से किया गया है।
उन्होंने इस वैचारिक परिवर्तन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और प्रज्ञा प्रवाह जैसी संस्थाओं की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया और कहा कि कुप्रचार के विरुद्ध तथ्य, विचार और संस्कृति के माध्यम से संघर्ष ही भारत की शक्ति है।
पुस्तक विमोचन के अवसर पर कार्यक्रम के अध्यक्ष श्रीहेमंत शर्मा, निदेशक, टीवी 9 भारत वर्ष, डॉ. रविंद्र कान्हेरे, अखिल भारतीय अध्यक्ष, विद्या भारती, श्री राकेश सिंह, मंत्री लोकनिर्माण विभाग, श्री प्रभात जी, प्रभात प्रकाशन, श्री दीपक शर्मा जी, अखिल भारतीय सह-संयोजक, प्रज्ञा प्रवाह एवं श्री धीरेंद्र चतुर्वेदी, संयोजक मध्यभारत प्रांत प्रज्ञा प्रवाह विशेष रूप से उपस्थित रहे।
श्री हेमंत शर्मा ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि यह पुस्तक केवल एक वैचारिक रचना नहीं, बल्कि भारत को उसकी सांस्कृतिक जड़ों से पुनः जोड़ने का सशक्त प्रयास है। उन्होंने कहा कि “इंडिया से भारत” पुस्तक के लेखक प्रशांत पोल निरंतर भारतीय समाज को पाश्चात्य मानसिकता से बाहर निकालकर आत्मगौरव से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं। यह पुस्तक नई पीढ़ी को यह सोचने के लिए प्रेरित करती है कि हम एक राष्ट्र के रूप में कौन हैं, हमारी पहचान क्या है और हमारी सांस्कृतिक जड़ें कहां हैं।
उन्होंने कहा कि एक समय भारत की बात करना रूढ़िवादी माना जाता था, लेकिन आज देशभर में सांस्कृतिक चेतना का नया दौर शुरू हुआ है।
उन्होंने कहा कि अब “अंग्रेजों भारत छोड़ो” के बाद वैचारिक स्तर पर “इंडिया भारत छोड़ो” जैसे आत्मबोध की आवश्यकता है, और यह पुस्तक उसी विचार का विस्तार है।
उन्होंने पुस्तक-पठन की घटती प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए कहा कि किताबें केवल जानकारी नहीं देतीं, बल्कि मनुष्य को प्रश्न करने, आत्ममंथन करने और बौद्धिक जड़ता से बाहर निकालने का कार्य करती हैं। “इंडिया से भारत” इसी प्रकार की वैचारिक हलचल पैदा करने वाली पुस्तक है।
कार्यक्रम में मध्यप्रदेश शासन के
21 कैबिनेट मंत्री सहित विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय के प्राध्यापक एवं विद्यार्थी भी शामिल हुए। इस दौरान प्रज्ञा प्रवाह के डॉ संजय द्विवेदी, श्री संजय जैन, डॉ. उदित्य सिंह सेंगर, डॉ. वंदना मिश्रा , केवली जैन भी उपस्थित हुए। कार्यक्रम का संचालन श्री अभिषेक शर्मा, युवा आयाम प्रमुख, मध्यभारत प्रांत, प्रज्ञा प्रवाह ने किया एवं आभार श्री धीरेंद्र चतुर्वेदी,संयोजक, मध्यभारत प्रांत, प्रज्ञा प्रवाह ने माना।
1965 से 2014 तक भारत की यात्रा को रेखांकित करती है पुस्तक ‘इंडिया से भारत’ : लेखक प्रशांत पोल
पुस्तक विमोचन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लेखक प्रशांत पोल ने कहा कि इस पुस्तक के लेखन की प्रेरणा उन्हें एक ऐसी ऐतिहासिक घटना से मिली, जिसने भारत की तत्कालीन राष्ट्रीय मानसिकता और अंतरराष्ट्रीय स्थिति को उजागर किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 1965 के भारत–पाकिस्तान युद्ध के दौरान गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री बलवंत राय मेहता की पाकिस्तान वायुसेना द्वारा हत्या कर दी गई थी। यह हमला उस समय किया गया, जब मुख्यमंत्री बलवंत राय मेहता कच्छ क्षेत्र का निरीक्षण करने के लिए एक नागरिक विमान से यात्रा कर रहे थे।
लेखक पोल ने कहा कि विमान में नागरिक होने के स्पष्ट संकेत देने के बावजूद पाकिस्तानी वायुसेना के सेबर जेट ने हमला कर विमान को मार गिराया, जिसमें मुख्यमंत्री सहित नौ लोगों की मृत्यु हो गई। इसके बावजूद देश में न तो व्यापक जनआक्रोश देखने को मिला और न ही इस घटना को राष्ट्रीय अपमान के रूप में लिया गया। उन्होंने इसे उस दौर के “हीन, दीन और लाचार भारत” का प्रतीक बताया।
उन्होंने आगे कहा कि इसी मानसिकता का एक और उदाहरण वर्ष 1969 में देखने को मिला, जब मोरक्को के रबात में इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) की बैठक में भारत को पाकिस्तान के विरोध के कारण अपमानजनक रूप से लौटना पड़ा। यह घटनाएं उस समय भारत की कमजोर अंतरराष्ट्रीय स्थिति को दर्शाती हैं।
लेखक पोल ने कहा कि यदि स्वतंत्रता के बाद भारत की आर्थिक प्रगति की तुलना श्रीलंका, पाकिस्तान, इज़राइल और दक्षिण कोरिया जैसे देशों से की जाए, तो 21वीं सदी के प्रारंभ तक भारत कई क्षेत्रों में पीछे रहा, जबकि ऐतिहासिक रूप से भारत हजारों वर्षों तक विश्व की सबसे समृद्ध और ज्ञानवान अर्थव्यवस्था रहा था।
उन्होंने सवाल उठाया कि प्रतिभाओं से परिपूर्ण होने के बावजूद भारत पीछे क्यों रह गया। इसका कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत अपनी भाषा, परंपरा, इतिहास और सांस्कृतिक पहचान से कटता चला गया। आक्रांताओं के महिमामंडन और औपनिवेशिक मानसिकता ने राष्ट्रीय आत्मगौरव को कमजोर किया।
लेखक पोल ने कहा वर्ष 2014 भारत के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ। इसके बाद भारत में आत्मविश्वास, नेतृत्व और निर्णय क्षमता का नया दौर शुरू हुआ। उन्होंने कोविड काल का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस देश को कभी केवल वैक्सीन की नकल करने वाला माना जाता था, उसी भारत ने एक वर्ष से भी कम समय में स्वदेशी वैक्सीन विकसित कर न केवल अपने नागरिकों की रक्षा की, बल्कि सौ से अधिक देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराई।
उन्होंने कहा कि आज विश्व के लगभग 70 प्रतिशत वैक्सीन का निर्माण भारत में हो रहा है। यह परिवर्तन “इंडिया से भारत” की यात्रा का प्रतीक है।
लेखक पोल ने इस वैचारिक परिवर्तन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया और कहा कि यह जागरण अचानक नहीं, बल्कि वर्षों के निरंतर प्रयास और सांस्कृतिक चेतना का परिणाम है। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जब भारत अपनी पहचान पर गर्व के साथ विश्व मंच पर खड़ा होगा, तब वह पुनः विश्वगुरु की दिशा में अग्रसर होगा। उन्होंने कहा कि यही भाव इस पुस्तक का मूल संदेश है और यदि इससे समाज को प्रेरणा मिलती है, तो उनका लेखन सफल है।
मुख्यमंत्री ने भारतीय ज्ञान परंपरा के पुनर्जागरण में प्रज्ञा प्रवाह की भूमिका को बताया निर्णायक
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रज्ञा प्रवाह की स्थापना 1987 में राष्ट्र की बौद्धिक शक्ति को संगठित कर भारतीय पुनर्जागरण के लक्ष्य से हुई थी। यह संगठन देश के विकास से जुड़ी मूलभूत और समसामयिक समस्याओं के अध्ययन, विश्लेषण और समाधान के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत भारतीय ज्ञान परंपरा को लेकर प्रज्ञा प्रवाह द्वारा विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में अध्ययन समूह संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने अपेक्षा जताई कि प्रदेश के सभी शासकीय और अशासकीय शिक्षण संस्थानों में भारतीय ज्ञान परंपरा से संबंधित उपलब्ध साहित्य पर अध्ययन समूह और चर्चा मंडल सक्रिय किए जाएं, जिससे विद्यार्थियों में पाठ्यक्रम से आगे बढ़कर अध्ययन और प्रस्तुति की क्षमता विकसित हो।
शोध प्रस्तुतियों के माध्यम से सूचना के अधिकार तथा युवा विमर्श से जुड़े महत्वपूर्ण निष्कर्षों को साझा किया
कार्यक्रम में प्रज्ञा प्रवाह के अंतर्गत मध्य प्रदेश पॉलिसी रिसर्च एनालिसिस लीग द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम विषय पर किए गए अध्ययन की रिपोर्ट अभिषेक शर्मा, संचिता जैन, डॉ. सविता भदौरिया एवं भूपेन्द्र सिंह जाटव द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। इसी क्रम में मध्य प्रदेश के युवाओं में विमर्श के बिंदुओं से संबंधित अध्ययन रिपोर्ट को डॉ. राम बाबू मेहर, कोकिला चतुर्वेदी, अम्बुज तिवारी तथा श्री अर्जुन सिंह ठाकुर द्वारा प्रस्तुत किया गया। यह शोध कार्य प्रज्ञा प्रवाह के अंतर्गत गठित टीम द्वारा संपन्न किया गया है। इस दौरान प्रज्ञा प्रवाह के युवा आयाम द्वारा शोध अध्ययन की रिपोर्ट की प्रतियां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को प्रदान की गई। इस पर उन्होंने कहा कि प्रज्ञा प्रवाह की टीम द्वारा जो शोध अध्ययन हुआ है, उसे शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को अध्ययन हेतु सौंपा जाएगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि ये अध्ययन प्रदेश के विकास में उपयोगी सिद्ध होंगे।