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ओमान की खाड़ी के पास होर्मुज जलडमरूमध्य में पलाव-ध्वज वाले तेल टैंकर ‘एमटी सेट्टेबेलो’ पर अमेरिकी नौसेना के मिसाइल हमले में तीन निर्दोष भारतीय नाविकों आदित्य शर्मा (डेक कैडेट), शिवानंद चौरसिया (इंजन फिटर) एवं पटनाला सुरेश (चीफ इंजीनियर) सदा के लिये मौत के आगोश में सो गए है.
वो हार्मूज के तंग खूनी दर्रो में तिरंगा लेकर चल रहे थे, ताकि भारत का नाम ऊँचा रहे. पर समंदर भी उन्हें महफूज लौटा नहीं सका और माँ भारती के 3 चिराग 🇮🇳⚓ बुझ गए. मैं समझ सकता हूँ, उनके परिजनों के दिलो का दर्द. ना कोई बंदूक, ना कोई सरहद. बस एक गलती, एक धमाका, और 3 घर उजड़ गए. ना जाने कितनो के सपने चूर-चूर हो गये. वो भले ही शहीद नहीं थे… पर कम शहीद से भी नहीं थे…. वो जांबाज जरूर थे. वो कोई फौज़ी जंग नहीं लड़ रहे थे… पर अपने परिजनों के लिये रोटी की जंग जरूर लड़ रहे थे. मेरे भाइयो तुम शहीद नहीं थे, पर तुमसे बड़ा सबूत क्या होगा वतनपरस्ती का? पराए मुल्क में भी, पराई जंग में भी, तुम मरते दम तक हिन्दुस्तानी रहे”.
अपने प्राणों की आहुति देने वाले इन वीर भारतीय नाविको का अदम्य साहस और कर्तव्य-निष्ठा हमेशा याद रखा जाएगा. यह तो आने वाला वक्त ही बतायागा कि उनकी मौत का कोई बदला लिया जाएगा या नहीं. अभी तो माँ भारती के इन तीनो जांबाज नाविको को मैं सलाम करता हूं और उन्हें अश्रुपूरित हार्दिक श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं.
ॐ शांति ॐ 😪
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