मौत के कुएं से निकलकर मां बनी बाघिन मस्तानी, 5 माह बाद 4 तंदुरुस्त शावकों के साथ रिजर्व के जंगल में अठखेलियां करती दिखी

शारदीय नवरात्र विशेष एक्सक्लूसिव

विशाल रजक तेन्दूखेड़ा

वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के जंगल से एक ऐसी कहानी सामने आई है जिसने हर किसी को भावुक कर दिया है। कभी मौत के मुहाने तक पहुंच चुकी बाघिन आज सुपर मॉम बनकर अपने शावकों के साथ जंगल में नई जिंदगी की मिसाल पेश कर रही है।
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व की बाघिन राधा और मस्तानी ने संघर्ष, मातृत्व और जिजीविषा की ऐसी कहानी लिखी है जो लोगों का दिल जीत रही है। टाइगर रिजर्व की बाघिन मस्तानी इन दिनों चर्चा का केंद्र बनी हुई है। इस बाघिन ने कठिन परिस्थितियों से लड़कर न सिर्फ खुद को बचाया बल्कि अब अपने शावकों के साथ जंगल में एक नए कुनबे की शुरुआत भी की है
वन विभाग के ट्रैप कैमरों में एक बाघिन अपने चार नन्हे शावकों के साथ जंगल में अठखेलियां करती हुई कैद हुई है। जन्म के 5 महीने बीत जाने के बाद भी चारों शावक पूरी तरह स्वस्थ और तंदुरुस्त नजर आ रहे हैं। यह वही बाघिन है जिसे पेंच टाइगर रिजर्व से रेस्क्यू कर लाया गया था जहां जंगली सूअर का पीछा करते हुए यह 30 फीट गहरे एक खुले कुएं में जा गिरी थी
वन्य जीव जगत में इसे किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा है, क्योंकि प्राकृतिक जंगलों में शुरुआती 6 महीनों के भीतर बाघ के शावकों की मृत्यु दर लगभग 50 फीसदी तक होती है। नर बाघों के हमले, बीमारियों और शिकारियों के खतरों के बीच चारों शावकों का सुरक्षित बचना एक बेहद सकारात्मक और शुभ संकेत है
संघर्ष की मिसाल: जब मौत को मात देकर निकली थी बाघिन
यह सिर्फ चार शावकों के जीवित बचने की खुशी नहीं है, बल्कि उस मां की जिजीविषा की जीत है जो खुद जिंदगी और मौत के बीच से गुजर चुकी है। 4 फरवरी 2025 को पेंच टाइगर रिजर्व के बफर जोन (सिवनी) के हरदोली गांव में जंगली सूअर का पीछा करते हुए यह बाघिन मस्तानी 30 फीट गहरे एक खुले कुएं में जा गिरी थी। 4 घंटे तक चले सांसें थाम देने वाले रेस्क्यू में वन विभाग की टीम ने क्रेन और चारपाई (खाट) की मदद से बाघिन और जंगली सूअर, दोनों को सकुशल बाहर निकाला था
रेस्क्यू के बाद नया घर, फिर मां बनी
रेस्क्यू के बाद बाघिन मस्तानी को रेडियो कॉलर पहनाकर 5 फरवरी को वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही क्षेत्र) में छोड़ा गया। बाघिन मस्तानी ने नए जंगल को अपना घर बनाया और अप्रैल 2026 में चार शावकों को जन्म दिया। अपनी जिंदगी में संघर्ष देख चुकी इस बाघिन ने अपने बच्चों को हर खतरे से बचाकर रखा। घने जंगलों, अन्य नर बाघों के दबाव और प्राकृतिक चुनौतियों के बावजूद उसने शावकों की सुरक्षा और भरण-पोषण में रत्ती भर भी ढील नहीं दी
मां बनने के बाद टूट गया था संपर्क
नौरादेही में बाघिन मस्तानी ने अप्रैल 2026 में चार शावकों को जन्म दिया। शुरुआत में वह एक-दो बार अपने बच्चों के साथ दिखाई दी, लेकिन इसके बाद अचानक उसकी गतिविधियों का पता चलना बंद हो गया। रेडियो कॉलर से भी लोकेशन नहीं मिलने के कारण वन विभाग के सामने उसकी तलाश चुनौती बन गई थी। लंबे समय तक कोई जानकारी नहीं मिलने से बाघिन और उसके शावकों को लेकर चिंता बढ़ती गई। अब ट्रैप कैमरों में पूरी फैमिली की मौजूदगी दर्ज होने से राहत मिली है। चारों शावकों का बड़ा और स्वस्थ दिखाई देना भी सकारात्मक संकेत है कुएं से सुरक्षित निकाले जाने के बाद नए जंगल में अपना ठिकाना बनाने और चार शावकों को जन्म देकर उनका पालन-पोषण करने तक बाघिन का सफर वन्यजीव संरक्षण और प्रकृति में जीवटता की प्रेरक कहानी बन गया है
पर्यटकों ने दिया था मस्तानी नाम
बाघिन एन-6 का यह नाम उसकी मस्तानी और शाही चाल (चलने के अंदाज) को देखकर पर्यटकों एवं वन विभाग के अधिकारियों द्वारा रखा गया था। विभागीय तौर पर बाघों को नाम नहीं दिया जाता, प्रबंधन के लिए नंबर दिया जाता है, लेकिन पर्यटन क्षेत्र के लोग उसे मस्तानी, कॉलर वाली जैसे नामों से पुकारते हैं
मदर ऑफ नौरादेही ‘राधा’ ने बसाया बाघों का कुनबा, टाइगर रिजर्व को दिलाई पहचान
साल 2018 में ढाई साल की एक बाघिन को नौरादेही अभयारण्य लाया गया था। यह पहला मौका था, जब किसी बाघिन ने यहां कदम रखा था। इसके पहले यहां तक पन्ना के बाघ आते-जाते रहते थे। बाघिन N-1 जिसे राधा नाम दिया गया था, से वंशवृद्धि के लिए बांधवगढ़ से साढ़े तीन साल का एक बाघ किशन N-2 लाया गया था। एक साल बाद राधा-किशन ने अपना कुनबा बढ़ाया और तीन शावकों को जन्म दिया था। मई 2019 में यहां पहली दफा नन्हें शावकों का जन्म हुआ था। राधा की बेटियां भी एक बार में तीन से चार शावकों को जन्म दे रही हैं
वर्तमान में यहां बाघों का कुनबा 30 के पार हो गया है और नौरादेही अभयारण्य को टाइगर रिजर्व की पहचान दिलाई आज इस रिजर्व में बाघ, तेंदुआ, भेड़िया सहित चीतों का भी तीसरा घर बन चुका है और यह एमपी का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है
प्रकृति में मातृत्व और संघर्ष की ताकत सबसे बड़ी
वन अधिकारियों के मुताबिक, इन बाघिनों ने साबित कर दिया कि प्रकृति में मातृत्व और संघर्ष की ताकत सबसे बड़ी होती है। यही वजह है कि लोग इन्हें अब “सुपर मॉम्स” कहकर पुकार रहे हैं। शावकों के शुरुआती महीने बेहद संवेदनशील होते हैं, इस दौरान वे सुरक्षा और शिकार के गुर सीखने के लिए पूरी तरह मां पर निर्भर रहते हैं

इनका कहना

कुछ समय पहले तक बाघिन के लापता होने की अफवाह थी, लेकिन वह अपने चार शावकों के साथ ट्रैप कैमरे में दिखी है। चारों शावक स्वस्थ हैं। घने वन क्षेत्र में कभी-कभी रेडियो कॉलर का सिग्नल नहीं मिलता। बाघों के प्रचलित नाम विभाग नहीं, पर्यटन क्षेत्र के लोग देते हैं
रजनीश सिंह, डिप्टी डायरेक्टर, वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व

Pradeep Jaiswal

Political Bureau Chief

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